Monday, December 17, 2018
घर पर बिजली बनाने का सबसे सरल पहले घर बैठे पैसे लो बाद मे काम करो
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Wednesday, December 12, 2018
Monday, December 10, 2018
6 बातें, जो आपके दिमाग के लिए फायदेमंद हैं

Tips To Avoid Stress in Hindi : जीवन में उतार-चढ़ाव लगे रहते हैं। जरूरत है तो बस खुद को बैलेंस्ड रखने की। कई बार आस-पास के शोर के कारण परेशानी होती है तो कई बार दिमाग में चल रही हलचल में खुद को बैलेंस्ड रखना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दिमाग को शांत रखने के लिए कुछ बातें फायदेमंद रहेंगी। जानिए इनके बारे में-
6 बातें, जो आपके दिमाग के लिए फायदेमंद हैं
BY kuldeep
Tips To Avoid Stress in Hindi : जीवन में उतार-चढ़ाव लगे रहते हैं। जरूरत है तो बस खुद को बैलेंस्ड रखने की। कई बार आस-पास के शोर के कारण परेशानी होती है तो कई बार दिमाग में चल रही हलचल में खुद को बैलेंस्ड रखना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दिमाग को शांत रखने के लिए कुछ बातें फायदेमंद रहेंगी। जानिए इनके बारे में-

1. सोच को काबू में रखिए
हर चीज दो बार बनती है। एक बार दिमाएक पल बुरा था तो उससे बाकी पल बुरे नहीं बन जाते हैं। इसी तरह से अगर दिन में कोई एक घटना बुरी हो गई है तो उससे पूरे दिन को बर्बाद नहीं किया जा सकता है।
4. किसी एक बुरी बात पर न टिकें
पूरी किताब की कहानी उसके एक चैप्टर में नहीं होती है। न ही कोई एक चैप्टर पूरी कहानी बता सकता है। इसी तरह से एक गलती करने से आपके चरित्र के बारे में पता नहीं चलता है। इसलिए जिंदगी के पन्ने बदलते जाएं यानी किसी एक बात या गलती पर टिके न रहें।
5. पुरानी बातों पर अफसोस न करें
ग में और दूसरी बार हकीकत में। इसलिए अपनी सोच को काबू में रखिए, क्योंकि आपकी सोच ही असलियत का रूप लेगी।
2. एक वक्त पर एक ही कदम बढ़ाएं
आज आपके साथ जो कुछ हो रहा है उसमें ऐसा कुछ नहीं है जो आपको आगे बढ़ने से रोकेगा। इसीलिए एक वक्त पर एक ही कदम बढ़ाएं यानी एक वक्त में एक ही काम को पूरी एकाग्रता और ईमानदारी से करें। इससे सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
3. किसी एक बुरी बात के कारण दिन बर्बाद न करेंगुजरी बातों पर जितना मर्जी अफसोस जताने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसी तरह से आने वाले भविष्य को लेकर चाहे जितना एक्साइटमेंट होगा तो भी फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन आज जो आपके पास है उसके लिए भगवान को शुक्रिया कहने से बहुत फर्क पड़ेगा।
6. ध्यान रखें जिंदगी हर पल बदलती है
आप कहीं फंस गए हैं, यह केवल एक अहसास है कोई हकीकत नहीं। इसलिए यह कभी मत सोचिए कि आप कहीं फंस गए हैं। जिंदगी हर सेकंड बदलती है और उसके साथ आप भी बदलते रहते हैं।
Allergy Ke Karan Lakshan Upchar |एलर्जी
Allergy Ke Karan Lakshan Upchar | किसी भी चीज के प्रति अतिसंवेदनशील होना ही एलर्जी है, जिसे स्वास्थ्य की भाषा में एटोपी (atopy) भी कहते हैं। एलर्जी किसी से भी हो सकती है, मौसम में बदलाव से, किसी खाने की चीज से, पालतु जानवर से, धूल से, धुएं से, सौंदर्य प्रसाधनों से या दवाओं आदि से।
- एसिडिटी के कारण, लक्षण, उपचार और उपायएलर्जी में शरीर का इम्यून सिस्टम कुछ खास चीजों को स्वीकार नहीं कर पाता। इन चीजों के प्रति इम्यूनिटी अयोग्य तरह से प्रतिक्रिया देती है। इम्यूनिटी द्वारा दी जाने वाली प्रतिक्रिया ही एलर्जी होती है। यूं देखा जाए तो अधिकतर एलर्जी खतरनाक नहीं होती लेकिन कभी कभी समस्या गंभीर हो जाती है।एलर्जी को रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए एलर्जी पैदा करने वाले कारणों से पूरी तरह दूर रहना होगा। यूं तो एलर्जी फैलने वाली बीमारी नहीं है फिर भी यदि किसी को नाक बहने और आंखों से पानी आने वाली एलर्जी हो तो उससे संपर्क बनाकर रखने में ही बेहतरी है। संभव हो तो उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए सामान को भी इस्तेमाल न करें।
- एलर्जी के प्रकार ( Types Of Allergy)
- डस्ट एलर्जी (Dust Allergy)
- लेटेक्स एलर्जी (Latex Allergy)
- मोल्ड एलर्जी (Mold Allergy)
- इन्सेक्ट स्टिंग एलर्जी (Insect Sting Allergy)
- पालतू जानवर से एलर्जी (Pet Allergy)
- राइनाइटिस एलर्जी (Rhinitis Allergy)
- स्किन एलर्जी (Skin Allergy)
- ड्रग एलर्जी (Drug Allergy)
- आइ एलर्जी (Eye Allergy)
एलर्जी के लक्षण (Symptoms of Allergy)- आंख में खुजली होना और आंख का लाल हो जाना
- आंख से पानी आना
- एग्जिमा और गर्मियों में बुखार
- गले में खुजली होना
- त्वचा पर खुजली होना
- त्वचा पर पित्त उठना
- त्वचा पर लाल चकत्ते और दाने होना
- नाक के अंदर बार- बार दाने निकलना
- नाक में बार-बार खुजली होना
- नाक से पानी आना
- धूल (Dust) – धूल के कण बहुत छोटे जीव होते हैं जो हमारे- आस पास की ज्यादातर वस्तुओं पर रहते हैं। यह कण उच्च आद्रता में पनपते हैं जो मृत त्वचा, बैक्टीरिया और फंगस आदि से अपना खाना प्राप्त करते हैं।
- खाना (Food) – कुछ लोगों को रोजमर्रा में खायी जाने वाली चीजों से भी एलर्जी होती है, जैसे मूंगफली, दूध और अंडा आदि। खाद्य पदार्थ से एलर्जी वाले लोगों को खाने के बाद जी मिचलाने, शरीर में खुजली होने या दाने निकलने की समस्या हो सकती है।
- खुशबू (Fragrance) – अच्छी खुशबू भले अच्छी लगती हो लेकिन यह भी कुछ लोगों की एलर्जी का कारण हो सकती है। परफ्यूम, खुशबू वाली मोमबत्तियां, कई तरह के ब्यूटी प्रॉडक्ट आदि की खुशबू से सिर दर्द, जी मिचलाने और नाक की एलर्जी हो सकती है।
- जानवर (Pets) – पालतु जानवर भी कई लोगों की एलर्जी का कारण होते हैं। जानवरों के बाल, उनके मुंह से निकलने वाली लार, रूसी आदि से कई गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।
- घास (Grass) – कई बार घास, पेड़ और फूल भी एलर्जी का कारण होते हैं। यह सब मौसमी एलर्जी का कारण होते हैं, जिनसे खुजली, आंखों में जलन, लगातार छींक आना और खुजली आदि की समस्या हो सकती है।
- धूल, धुंआ और गंदगी से बचकर रहें।
- कुछ दवाओं जैसे एस्पिरीन, निमुसलाइड आदि के सेवन में सावधानी बरतें।
- खट्टी चीजों, जैसे अचार आदि का इस्तेमाल कम करें।
- ऐसे खाद्य पदार्थ जिन्हें खाने से एलर्जी है, उन्हें न खाएं।
- गंदगी से एलर्जी वाले लोगों को समय-समय पर चादर, तकिये के कवर और पर्दे आदि बदलते रहने चाहिए।
- शहद (Honey) – शहद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। रोजाना दो चम्मच शहद का इस्तेमाल शरीर को काफी लाभ पहुंचाता है। एक गिलास गुनगुने पानी में शहद मिला कर पीने से या दूध में शहद मिला कर पीने से काफी लाभ पहुंचता है।
- सेब (Apple) – रोजाना एक सेब खाने से इम्यून सिस्टम (immune system) बेहतर होता है और आप एलर्जी से दूर रहते हैं। सेब का जूस भी पीया जा सकता है।
- हल्दी (Turmeric) – एलर्जी से बचाने में हल्दी भी काफी प्रभावशाली है। हल्दी में ताकतवर एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो एलर्जी से लड़ने में मदद करते हैं। एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से काफी लाभ पहुंचता है।
- लहसून (Garlic) – लहसून भी एक एंटी एलर्जी खाद्य पदार्थ है जिसे अपनी डाइट में शामिल करना आवश्यक है। यह एक एंटी बॉयोटिक, एंटी ऑक्सीडेंट और इम्यूनिटी बढ़ाने वाला खाद्य पदार्थ है। लहसून को सब्जी में डालकर या सुबह खाली पेट एक दो कली पानी के साथ निगलने से काफी फायदा होता है।
- नींबू (Lemon) – नींबू में उच्च मात्रा में विटामिन सी और एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है। नींबू इम्यून सिस्टम बढ़ाता है और एलर्जी से दूर रखने में काफी फायदेमंद साबित होता है।
- अदरक (Ginger) – अदरक के सेवन से सांस की बीमारी में आराम मिलता है। ऐसे में यह अस्थमा से संबंधित एलर्जी में काफी आराम पहुंचाता है। रोजाना अदरक का सेवन करने से एलर्जी से राहत पाई जा सकती है। डॉक्टर की सलाह पर अदरक के सप्लीमेंट भी लिए जा सकते हैं।
- ग्रीन टी (Green tea) – ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। इसमें मौजूद थियानीन भी एलर्जी से बचाने में मदद करता है। यदि किसी को ग्रीन टी पसंद न हो तो ब्लैक टी भी पी जा सकती है।
- बादाम (Almond) – बादाम में विटामिन बी, ई, मैग्नीशियम, जिंक, सेलेनियम (selenium) तथा अन्य स्वास्थ्यवर्धक वसा पाई जाती है। जिस कारण यह तनाव से तो राहत देते ही हैं साथ ही एलर्जी से बचाने में भी मदद करते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेज कर शरीर और दिमाग को मजबूती देते हैं। बादाम को भून कर या कच्चा भी खाया जा सकता है। यदि ऐसे खाना संभव न हो तो बादाम का पाउडर बनाकर, दूध के साथ खाया जा सकता है। kuldeepsharma
एलर्जी का उपचार (Treatment of Allergy) –एलर्जी के घरेलू नुस्खे (Allergy ke Gharelu Nuskhe) –
Saturday, December 8, 2018
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सपने साकार करने हैं, तो अपने घर का मासिक बजट बनाईए
सपने साकार करने हैं, तो अपने घर का मासिक बजट बनाईए
- आपके सपने साकार होने से क्यों रह जाते हैं?
- क्यों आप कोई वस्तु खरीदना चाहते हैं लेकिन उसके लिए आपके पास कभी पर्याप्त पैसे नहीं बचते?
- क्यों हमेंशा आपकी आमदमी से आपके खर्चे ज्यादा रहते हैं, चाहे आपकी Salary कितनी ही क्यों न बढ़ जाए।
- क्यों आप अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज लेने पर मजबूर हो जाते हैं?
- क्यों आप हमेंशा आर्थिक तंगी से घिरे रहते हैं?
यदि पर्याप्त मासिक आय होने के बावजूद भी अक्सर अाप स्वयं को आर्थिक तंगी से बेहद परेशान पाते हैं तो निश्चित रूप से आप कहीं तो गलती कर रहे हैं और आप एक बहुत ही मामूली सी गलती कर रहे हैं।
आप अपनी जरूरतों और इच्छाओं में फर्क नहीं कर पा रहे हैं।
आप अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए इतना खर्च कर देते हैं कि अपनी जरूरतों की पूर्ति करने के लिए आपके पास कुछ बचता ही नहीं है। फिर उन जरूरतों को पूरा करने के लिए या तो आप कर्ज लेते हैं या फिर आप अपनी उन जरूरतों के साथ समझौता करते हैं, अपने मन को मारते हैं और आर्थिक स्थिति अच्छी होने पर उन जरूरतों को कभी भविष्य में पूरा करने के लिए स्थगित (Postpone) करते हैं।
जबकि सच्चाई ये है कि जब आप पर्याप्त मासिक आय प्राप्त करने के बावजूद अपनी जरूरतों को वर्तमान में पूरा नहीं कर पा रहे हैं, तो भविष्य में कैसे कर पाऐंगे क्योंकि आपका भविष्य भी तो वर्तमान बनकर ही आपके सामने आएगा।
यानी यदि सरलतम शब्दों में कहें तो आप हमेंशा आर्थिक तंगी से परेशान रहेंगे, फिर इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी मासिक आय 10 हजार है या 10 लाख, क्योंकि आपकी आर्थिक तंगी का मुख्य कारण आपके मासिक आय की कमी नहीं है, बल्कि आप द्वारा अपनी इच्छाओं व जरूरतों की पूर्ति के लिए किए जाने वाले खर्चों के बीच अन्तर न कर पाने की कमी है।
यदि आप समझ लें कि आप द्वारा किए जाने वाले खर्चें आपकी जरूरतों काे पूरा कर रहे हैं या आपकी इच्छाओं काे, तो आप आसानी से तय कर सकेंगे कि आपको कौनसे खर्चे प्राथमिकता के साथ करने चाहिए और कौनसे खर्चों में कटौती करनी चाहिए, ताकि आपकी जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें।
अब सवाल ये है कि आप पता कैसे लगाऐंगे कि आप जो खर्चे कर रहे हैं, वो आपकी जरूरत से सम्बंधित हैं या आपकी किसी इच्छा से?
क्योंकि सामान्यत: आपको हमेंशा यही लगता है कि आप कभी फिजूल खर्ची करते ही नहीं बल्कि केवल अपनी जरूरते पूरी करने के लिए ही खर्च करते हैं, लेकिन यदि आप पर्याप्त मासिक आय प्राप्त करने के बावजूद आर्थिक तंगी महसूस करते हैं, तो निश्चित रूप से आप अपनी जरूरतों को पूरा करने से ज्यादा अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए खर्च कर रहे हैं।
इस बात का पता लगाना काफी आसान है कि आपके कौनसे खर्चे आपकी जरूरतों को पूरा करने से सम्बंधित हैं और कौनसे आपकी इच्छाओं को?
यदि आप जिस चीज को प्राप्त करने के लिए खर्च करने जा रहे हैं, उस चीज के बिना भी आने वाले कुछ समय तक अपना काम चला सकते हैं, तो सम्भवत: आप अपनी किसी इच्छा को पूरा करने के लिए खर्च करने जा रहे हैं, क्योंकि जरूरतों से सम्बंधित खर्चों को Postpone (स्थगित) नहीं किया जा सकता।
उदाहरण के लिए यदि आपको नया Mobile Phone लेना चाहते हैं, तो एक स्थिति में आप द्वारा Mobile Phone के लिए किया जाने वाला खर्च, आपकी जरूरत हो सकता है, जबकि दूसरी स्थिति में वही खर्च, आपकी इच्छा भी हो सकता है।
कैसे?
चलिए, समझने की कोशिश करते हैं। मान लीजिए कि आपके पास पहले से एक Mobile Phone है, लेकिन अब आप उसे बदल कर Latest Version का Samsung Android Phone लेना चाहते हैं, तो आप द्वारा किया जाने वाला ये खर्च, आपकी इच्छापूर्ति से सम्बंधित है, क्योंकि यदि आप ये Mobile न लें, तब भी आने वाले कुछ समय तक आपका काम आपके Current Mobile Phone से चल सकता है। लेकिन यदि आपका पुराना Mobile Phone, पानी में गिर जाने की वजह से पूरी तरह से खराब हो गया है, तो इस स्थिति में आप द्वारा नए Mobile Phone के लिए किया जाने वाला खर्च, आपकी जरूरत को पूरा करने से सम्बंधित है।
यहां भी यदि आप अपने Mobile Phone को मूलत: केवल बातचीत करने के लिए ही Use करते हैं, तो आपकी जरूरत एक साधारण से Mobile Phone से भी पूरी हो सकती है।लेकिन केवल बातचीत करने मात्र की जरूरत को पूरा करने के लिए यदि आप Latest Version का Samsung Android Smart Phone खरीदना चाहते हैं, तो फिर से ये खर्च आपकी जरूरत नहीं बल्कि आपकी इच्छा से सम्बंधित होगा।
यदि आप खर्च करने से पहले अपने अाप से केवल ये सवाल पूछें कि क्या आपका काम, वह खर्च किए बिना भी चल सकता है या नहीं, तो आपको तुरन्त पता चल जाएगा कि आप जो खर्च करना चाहते हैं, वह आपकी जरूरत से सम्बंधित है या नहीं और हर महीने की विभिन्न प्रकार की जरूरतें पूरी करने के बाद आपके पास जो बचता है, यदि आप उसे अपनी इच्छाऐं पूरी करने के लिए खर्च करेंगे, तो आप कभी भी आर्थिक तंगी महसूस नहीं करेंगे, फिर चाहे आपकी मासिक आय न्यूनतम ही क्यों न हो।
हालांकि हम सभी इसीलिए धन कमाते हैं ताकि अपनी जरूरतों के साथ ही भौतिक सुख-सुविधाओं से सम्बंधित अपनी इच्छाओं की भी पूर्ति कर सकें और ऐसा करना गलत भी नहीं है। लेकिन परेशानी तब पैदा होती है, जब इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए किया जाने वाला खर्च इतना ज्यादा हो जाए कि हमारी सामान्य जरूरतें पूरी करने के लिए हमें कर्ज लेना पडे़।
इसलिए जरूरतों व इच्छाअों, दोनों की पूर्ति बिना किसी परेशानी के हो सके, इसके लिए जरूरी है कि दोनों के लिए किए जाने वाले खर्च में एक संतुलन हो और आप ये संतुलन तभी बना सकते हैं, जबकि आप न केवल विभिन्न तरीकों से होने वाली अपनी सभी प्रकार की आय (Income) को बल्कि विभिन्न मदों पर होने वाले अपने सभी प्रकार के खर्चों (Expenses) को भी Note करें और आय-व्यय (Income-Expense) के इस ब्यौरे के आधार पर हर महीने, हर तीन महीने और हर साल के लिए अपना घरेलू बजट (Home Budget) बनाऐं क्योंकि आपका बजट ही तय करता है कि आर्थिक रूप से आपका भविष्य कैसा होगा।
क्या होता है बजट और कैसे बनाया जाता है मासिक, त्रैमासिक व वार्षिक घरेलू बजट, ताकि न केवल आपकी जरूरतें पूरी हो सकें बल्कि आप अपने सपने भी साकार कर सकें, और पा सकें Tension Free Financial Freedom अपनी इच्छानुसार। जानिए विस्तार से, अगले Article में।
ज्यादातर भारतीय पैसों के मामले में नासमझ हैं।
ज्यादातर भारतीय पैसों के मामले में नासमझ हैं।
Financial Literacy in India – Banking System किसी भी देश का सबसे बुनियादी Financial System होता है, जो कि पूरी तरह से लोगों के पैसों यानी Public Finance पर ही आधारित होता है क्योंकि Banking System के अन्तर्गत बुनियादी रूप से आम लोगों की बचत (Savings) का धन जमा होता है
और उसी धन को अन्य लोगों को उन लोगों को Loan के रूप में दिया जाता है, जो कि अपना कोई छोटा-मोटा Business लगाना चाहते हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त धन नहीं है, अथवा उन लोगों को दिया जाता है, जिनके पास अपनी कोई अच्छी नौकरी या Business तो है, लेकिन किसी अन्य प्रकार की जरूरत जैसे कि बच्चों के Higher Education, Marriage, नया घर या नई कार आदि के लिए उनके पाए एक-मुश्त रकम नहीं है।ऐसे में Bank वह स्थान होता है, जहां से लोग अपनी जरूरतों या इच्छाओं को पूरा करने के लिए एक Reasonable Interest Rate पर Loan ले सकते हैं।
किसी देश का Banking System जितना मजबूत होता है, वह देश भी उतना ही मजबूत होता है क्योंकि वर्तमान समय में देश की आर्थिक स्थिति से ही देश की ताकत को मापा जाता है। जबकि देश का Banking System तभी मजबूत हो सकता है, जबकि उस देश के ज्यादा से ज्यादा लोग Banking System से जुड़े हों और Banking System का उपयोग करते हों।
लेकिन हमारे देश की स्थिति ये है कि आजादी के लगभग 6 दशक बाद तक भी सभी भारतीय लोगों के Saving Bank Account तक नहीं हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में लगभग 24 करोड़ 67 लाख परिवारों में लगभग 100 करोड़ से ज्यादा लोग रहते थे, लेकिन आजादी के लगभग 65+ सालों बाद भी इनमें से केवल 14 करोड़ 78 लाख लोग ही भारत की Banking Services से जुड़ पाए, जबकि भारतीय गाँवों में रहने वाले लोगों के भारतीय Banking System के साथ Interaction की स्थिति तो और भी दयनीय है।
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी के लगभग 65% यानी लगभग 70 करोड़ से ज्यादा लोग गाँवों में रहते थे और भारत के गॉंवों में बसने वाले 16 करोड़ परिवारों में रहने वाले इन 70 करोड़ से ज्यादा लोगों में से भी केवल 9 करोड़ 14 लाख लोगों के पास ही अपना Bank Account था। जबकि 2012 में World Bank के द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार 2012 तक भारत देश में रहने वाले सभी भारतीयों में से केवल 35% लोगों के पास ही Bank Account थे और इन में से भी केवल 8% लोगों ने ही Bank से किसी प्रकार का छोटा-मोटा Loan ले रखा था।
जिस देश में 65+ सालों में देश की आबादी के कुल 25% लोग भी उस देश के सबसे बुनियादी Financial System यानी Banking System से नहीं जुड़ पाए, वह देश कैसे आर्थिक तरक्की कर सकता है, कैसे गरीबी से उबर सकता है?
क्यों कम है भारत में Banking System व अन्य Financial Services की पहुँच?
इस सवाल का जवाब 2013 में 16 से 64 वर्ष तक की उम्र के लोगों पर किए गए इस सर्वे में मिला, जिसके अनुसार Financial Literacy यानी Banking, Saving और Investing की समझ के मामले में भारत, एशिया पेसिफिक इलाके के 16 देशों में भी सबसे आखिरी पायदान पर है।
क्योंकि भारतीय लोगों को पता ही नहीं है कि पैसों से सम्बंधित भी कुछ पढ़ाई, कुछ जानकारी होती है, जिसे सीखा-समझा जा सकता है और हमेंशा पैसा कमाने के लिए ही काम नहीं करना होता, बल्कि पैसे से पैसा भी बनाया जा सकता है। अर्थात उनका पैसा भी उनके लिए काम कर सकता है, उनके लिए कमाई कर सकता है।
Financial Literacy के अन्तर्गत बहुत सारे Tools व Instruments शामिल होते हैं, लेकिन सम्पूर्ण Financial Literacyकी शुरूआत होती है Banking System से क्योंकि Banking System ही सभी प्रकार के Financial Systems के Center में होता है और ज्यादातर भारतीय लोगों को यदि किसी तरह के Financial Instrument के संदर्भ में थोड़ी-बहुत समझ है भी, तो वो मात्र Banking ही है।
यदि कोई सर्वे किया जाए और उस सर्वे में भारतीयों से पूछा जाए कि वे अपनी बचत को बढ़ाने यानी पैसे से पैसा बनाने के लिए क्या करते हैं, तो ज्यादातर भारतीय लोगों को अपनी बचत के पैसों को Property में Invest करने अथवा Bank FD में Deposit करने से आगे कुछ पता ही नहीं है और जो इनसे थोड़ा ज्यादा जानते हैं, वे भी ज्यादा से ज्यादा Gold में Invest करने से अधिक कुछ नहीं जानते। लगभग 99% लोग, जो कि अपना Life Insurance करवाते हैं, वे तो उस Insurance को ही अपना Investment समझते हैं, जबकि सच्चाई ये है कि Insurance, Investment है ही नहीं।
जब हमारे देश में आजादी के 65+ सालों बाद अभी तक सभी लोगों का Saving Bank Account तक नहीं है, यानी अभी तक हमारे देश के ज्यादातर लोगों को Basic Banking Services की समझ भी नहीं है, तो Mutual Funds, Gold ETF, Stock Market जैसी Advanced Savings and Investment की योजनाओं तथा Insurance के बारे में उन्हें कितना ज्ञान होगा, हम केवल अंदाजा ही लगा सकते हैं जबकि अमेरिका जैसे देशों में प्रत्येक व्यक्ति की आय का औसतन 35% से ज्यादा तो Insurance Premium के रूप में ही कट जाता है, क्योंकि वहाँ का आम व्यक्ति तक जानता है कि Insurance और Investment का क्या महत्व है जबकि हमारे देश के Master Degree प्राप्त पढ़े-लिखे लोगों के लिए भी Insurance व Investment दोनों एक ही चीज के दो नाम हैं।
2013 के ही आंकड़े बताते हैं कि भारत के लगभग 25 करोड़ परिवारों में 10% से भी कम यानी लगभग 2.5 करोड़ परिवार ही अपनी Savings काे Mutual Fund Schemes में Invest करते थे। इनमें भी 40% से ज्यादा Mutual Funds Investors, हमारे देश के कुल 4-5 Metro Cities (दिल्ली, मुम्बई, कलकत्ता, मद्रास जैसे बड़े शहरों) से हैं, जबकि हमारे देश में 29 राज्य, 7 केन्द्र-शासित प्रदेश, 685+ जिले, 5560+ तहसील और हर तहसील मे औसतन 10 से 15 गांव हैं। क्या हम अंदाजा लगा सकते हैं कि 50000+ छोटे-मोटे गांवों-शहरों से बना हमारा देश, Financially कितना Educated है?
हमारे देश में Mutual Funds Industry की Growth दुनिया की दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भी काफी कम है। भारत में Mutual Funds Industry की Growth, 15% सालाना से भी कम है, जो कि देश की आबादी को देखते हुए न के बराबर है, जबकि ब्राजील में यही Growth 40% और साउथ अफ्रीका में 33% सालाना के आसपास है, जिनकी आबादी भारत की तुलना में कई गुना कम है।
इससे भी बुरा हाल ताे हमारे देश में Stock Market Investment का है। Stock Market का नाम सुनते ही भारतीयों का Reaction तो ऐसा होता है जैसे बिच्छु ने डंक मार दिया हो। भारतीयों के लिए तो Stock Market एक तरह से Government Authorized Casino यानी एक सरकारी मान्यता प्राप्त जुआखाना है। जिसने भी Stock Market का नाम सुना है, वह उसकी बुराई ही करता है, चाहे अपनी पूरी जिन्दगी में वह किसी Stock Broker के Office के सामने से भी न गुजरा हो। जबकि सच्चाई ये है कि किसी भी देश की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका आंकलन उस देश के Stock Market में होने वाले लेनदेन के आधार पर ही किया जाता है।
सन 1982 के आसपास हमारे देश में BSE (Bombay Stock Exchange) के नाम से मात्र 100 अंक से Stock Market की शुरूआत हुई थी, जो आज बढ़ते हुए 25000 तक पहुंच चुका है, लेकिन अभी भी हमारे सम्पूर्ण देश के सभी लोगों द्वारा सभी तरीकों से जितना लेनदेन हमारे Stock Market में होता है, हर रोज उससे कई गुना ज्यादा Foreign Investor हमारे Stock Market में Invest करते हैं। दुनियॉं का दूसरा सबसे बड़ा देश होने के बावजूद, हमारे देश की अर्थव्यवस्था को जापान जैसे छोटे से देश में होने वाली घटनााऐं प्रभावित करती हैं क्योंकि हमारे Stock Market में हम भारतीयों से ज्यादा पैसा जापान जैसे छोटे-छोटे देश Invest करते हैं।
एक आँकड़े के मुताबिक 2011 तक भारत में लगभग 25 करोड़ परिवारों में से केवल 2% परिवार ही अपनी Savings को Share Market में Invest करते थे और इनमें से भी 80% Investors देश के केवल 10 बड़े शहरों में से हैं और इस स्थिति में पिछले 5 सालों में भी कोई विशेष सुधार नहीं आया है। अब जिस देश की अर्थव्यवस्था का आंकलन करने वाले Stock Market को ही सरकारी जुआघर माना जाता रहा हो, उस देश के लोगों का उस देश की आर्थिक तरक्की में कितना सहयोग है, अन्दाजा लगाना कठिन नहीं है।
ये आँकड़े बताते हैं कि Mutual Funds और Equity Market को लेकर भारत के छोटे शहरों और गाँवों में जानकारी का कितना अभाव है और Investment को लेकर हमारे देश में जो थोड़ी बहुत जानकारी है भी, वो भी केवल परंपरागत Fixed Depositsऔर Life Insurance तक ही सीमित है, जिसे भारतीय लोग अपना Investment समझते हैं।
क्या करना चाहिए Financial Literacy in India के लिए?
एक ही जवाब है इस सवाल का।
Financially Literate होईए और भारत की अर्थव्यवस्था में अपना सहयोग दीजिए।
भारत की अर्थव्यवस्था में जब तक ज्यादा से ज्यादा भारतीयों का Financial Inclusion नहीं होगा, तब तक ये देश विकसित नहीं हो सकता।
Stock Market कोई जुआखाना नहीं है बल्कि जब आप Stock Market में Invest करते हैं, तब आपका पैसा भारत की Industries में जाता है, जिससे नई नौकरियाॅं व नए रोजगार Create होते हैं। इससे न केवल भारत की Industries का आर्थिक विकास होता है, बल्कि Companies की आर्थिक तरक्की के साथ ही आपके Share का Price भी बढ़ता है जिससे आपकी भी आर्थिक तरक्की होती है।
इसलिए जानिए, सीखिए और समझिए कि पैसा कैसे काम करता है और Bank FD व Property में Investment से थोड़ा ऊपर उठिए, Mutual Funds व Stock Market Investment के बारे में सोंचिए, सीखिए और सहयोग कीजिए। नहीं तो न आप कभी अपनी आर्थिक तंगी से निकल पाऐंगे न ही ये देश कभी आर्थिक रूप से विकसित हो पाएगा।
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